Naraina Jaipur Rajasthan नरैना

फुलेरा और आमेर के बीच स्थित नरैना एक छोटा रेलवे स्टेशन है । यह जयपुर से 80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । यह शाकम्भरी(सांभर) क्षेत्र का एक प्राचीन कस्बा है । साहित्यिक ग्रन्थों और शिलालेखों में इसके विविध नाम मिलते हैं यथा नरानयन, नरना, नरनका, नराण, नरपुर, नारायणपुर…

Karansar Jaipur Rajasthan करणसर राजस्थान

Karansar Jaipur Rajasthan: जयपुर से लगभग 50 कि.मी. दूर हिंगोणिया के निकट स्थित करणसर का दुर्ग देखते ही बनता है । रियासती काल में करणसर पहले खंगारोत कछवाहों के अधीन रहा । फिर खालसा जागीर में रहने के बाद मेवाड़ (उदयपुर) के सिसोदिया राजवंश की राणावत शाखा के अधिकार में रहा । सवाई…

Tunga Jaipur तुंगा राजस्थान

जयपुर से 45 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में जयपुर-लालसोट मार्ग पर स्थित तुंगा रियासत काल में बांकावत कछवाहों के अधीन था । तुंगा से बिसाऊ के ठाकुर सूरजमल शेखावत का ई.1787 का एक शिलालेख प्राप्त हुआ । शिलालेख कछवाहों तथा मराठों के बीच हुए युध से सम्बंधित है जिसमें सूरजमल शेखावत ने वीरगति प्राप्त…

Kotputli Rajasthan कोटपुतली

Kotputli Rajasthan: कोटपुतली जयपुर से लगभग 105 कि.मी. दूर जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर स्थित है । यहाँ से थोड़ी ही दूरी पर बुचाड़ा बांध स्थित है जहाँ लोग घूमने आते है। कोटपुतली के सार्वजानिक निर्माण विभाग का डाक बंगला खेतड़ी के ठाकुर ने बनवाया था । लॉर्ड लेक के नाम पर…

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Laxmi Jagdish Temple Goner Jaipur लक्ष्मी जगदीश मन्दिर गोनेर

Laxmi Jagdish Temple Goner: जयपुर से जगभग 25 कि.मी दूर जयपुर-आगरा राजमार्ग पर चूलगिरी के पास गोनेर गांव है । यहाँ लक्ष्मी जगदीश मन्दिर लोक आस्था का केन्द्र है । लोकमान्यता है की भगवान लक्ष्मीनारायण की इस मूर्ति को “देवदास” नामक ब्राह्मण ने दैवीय प्रेरणा से खेत में से खोदकर निकला था तथा…

Jaitra Singh of Mewar जैत्रसिंह

Jaitra Singh (1213-1252)              मध्यकालीन मेवाड़ के इतिहास में जैत्रसिंह का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उसके सुयोग्य नेतृत्व में मेवाड़ राज्य की शक्ति का विस्तार हुआ। मेवाड़ के पडोसी राज्य ही नहीं अपितु दिल्ली के तुर्क सुलतान भी मेवाड़ की शक्ति से सशंकित हो उठे और उसकी…

Jamwa Ramgarh जमवा रामगढ

Jamwa Ramgarh Jaipur:         जमवा रामगढ जयपुर से 27 किलोमीटर दूर स्थित है। पहले यह स्थान मांच कहलाता था तथा यहां मीणा के सीहरा शाखा का राज था। नरवर के राजकुमार दूलहराय ने यहां के शासक नाथू मीणा को परास्त कर यहां अपना अधिकार स्थापित कर इस स्थान…

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